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खटीक समाज लोकसभा चुनाव में उतारेगा अपने प्रत्याशी

राजेंश सोनकर फतेहपुर से लड़ेंगे लोकसभा चुनाव फतेहपुर।

अखिल भारतीय खटिक समाज के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश सोनकर ने बताया कि 13 जनवरी को वाराणसी के सीताराम भवन में आयोजित खिचड़ी भोज व खटिक समाज सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि दिलीप सोनकर राष्ट्रीय संरक्षक राजन प्रताप सोनकर की अध्यक्षता में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी किशन लाल सोनकर, कैलाश सोनकर विधायक अजगरा दिलीप सोनकर सहित समिति के अन्य सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति लोकसभा चुनाव में अखिल भारतीय खटिक समाज द्वारा प्रत्याशी मैदान में उतारे जाने का निर्णय किया गया। जिसमे फतेहपुर से राजेश सोनकर, कौशाम्बी से रिंकू सोनकर, बहराइच से जसवंत लाल सोनकर, गाजीपुर से राजन प्रताप सोनकर, लालगंज से डा. पंकज मोहन सोनकर, आगरा से परमाल चक, मछली शहर से अनिल सोनकर गांगुली, हाथरस से अनिल सरवालिया के नामों पर सर्वसम्मति से सहमति बनाते हुए निर्णय लिया गया। राजेंश सोनकर से दूरभाष के जरिये जानकारी देते हुए बताया कि राजनैतिक दलों द्वारा खटिक समाज की पर्याप्त वरीयता न दिए जाने से खटिक समाज लोकसभा चुनाव अपने सन्गठन के बैनर तले अपने प्रत्याशी उतारने के साथ साथ जीत दर्ज कराएगा।

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सेना में "खटीक रेजिमेंट" भी होना चाहिए - खटीक महासंघ

जब यादव समाज के लोग सेना में "अहीर रेजिमेंट" बनाने के लिए सरकार पर दबाव बना सकते हैं तो खटीक पीछे क्यों रहें। खटीक भी योद्धा थे यहां तक कि खटीक तो सूर्यवंशी क्षत्रिय भी माने जाते हैं तो क्यों ना खटीक समाज भी सेना में "खटीक रेजिमेंट" की मांग करें। अगर सरकार जाति आधारित रेजिमेंट नहीं दे सकती तो मौजूदा जितनी भी जाति आधारित रेजिमेंट बनी हुई हैं उनको तुरन्त समाप्त किया जाए।

मेरे हिसाब से तो जाति आधारित रेजिमेंट होनी ही नहीं चाहिये क्योंकि इससे ऊंची जातियों में घमंड की भावना आती है जिससे छुआछूत को बढ़ावा मिलता है। अच्छा तो यही होगा कि सरकार को जाट रेजिमेंट, राजपूत रेजिमेंट आदि को खत्म कर देना चाहिए। अगर सरकार इनके दबाव के कारण इनको खत्म नहीं कर पा रही है तो खटीक रेजिमेंट भी होनी ही चाहिए।

सेना में “राजपूत रेजिमेंट” है तो फिर “चमार, खटिक रेजिमेंट” क्यों नहीं- उदित राज

नई दिल्ली। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद उदित राज ने सरकार से सवाल किया कि जब भारतीय सेना में राजपूत रेजिमेंट हो सकता है तो चमार रेजिमेंट, खटिक रेजिमेंट और वाल्मीकि रेजिडेंट क्यों नहीं हो सकता है। उदित राज ने कहा कि चमार रेजिंडेंट का खत्म कर दिया गया था। इसके पीछे तर्क दिया गया था कि जाति के आधार पर रेजिमेंट नहीं बना सकते हैं, तो फिर सरकार ये बताए कि जाति के आधार पर राजपूत रेजिमेंट क्यों है। उन्होंने कहा कि चमार, खटिक और वाल्मीकि रेजिमेंट बनाया जाना चाहिए।

खटीक समाज – हिन्दू खटीक जाति का गौरवशाली इतिहास

हिन्दू खटीक समाज के इतिहास को लेकर अनेक प्रकार की बातें कही जाती हैं। कुछ समाज चिंतकों के अनुसार खटीक जाति क्षत्रिय जाति है तो तो कुछ खटीकों को दलित जाति मानते हैं। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से खटीक समाज के इतिहास सम्बन्धी तथ्यों पर प्रकाश डालेंगे।
खटीक समाज – हिन्दू खटीक जाति के गोत्र (सरनेम)
कौन हैं खटीक?खटीक भारत का एक मूल समुदाय यानि जाति है जो वर्तमान में अनुसूचित जाति के अंतर्गत वर्गीकृत की गई है। जिनकी संख्या लगभग 1.7 मिलियन है। भारत में यह उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, चंडीगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार और गुजरात में बसे हुए हैं। तथा व्यापक रूप से उत्तर भारत में बसा हुआ है।
प्रत्येक खटीक उपजाति का अपना मूल मिथक है, वे ऐतिहासिक रूप से क्षत्रिय थे जिन्हें राजाओं द्वारा यज्ञ में पशुओं की बलि करने का कार्य सौंपा गया था। आज भी हिंदू मंदिरों में बलि के दौरान जानवरों को वध करने का अधिकार केवल खटीकों को ही है।

खटीक समाज की पुस्तक  खटीक जाति - आखेटक  प्राप्त करें। 

खटीक समाज की एक परंपरा के अनुसार खटिक शब्द का उद्गम हिंदी …