क्या है SC/ST Act 1989 जो देता है अनुसूचित जाति/जनजाति को सुरक्षा -अत्याचार निरोधक कानून 1989

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एससी/एसटी एक्ट (Sc/St Act) कब आया।

अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम(अत्याचार निरोधक) 11 सितंबर को अधिनियमित किया गया था,अथार्थ तब से यह कानून बन गया था।तब केंद्र में राजीव गांधी (कांग्रेस) की सरकार थी। यह कानून 30 जनवरी से संपूर्ण भारतवर्ष पर लागू कर दिया गया। सिवाय जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़ कर। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस कानून में अप्रैल में कुछ संशोधन किए तथा उन संशोधनों के साथ 14 अप्रैल 2016 को इस कानून को फिर से लागू कर दिया गया। इस कानून में कुल 5 अध्याय व 23 धाराएं हैं।

एससी/एसटी एक्ट (Sc/St Act) अस्तित्व में क्यों आया?

एससी/एसटी एक्ट 1989 में अस्तित्व में आया।जब यह बिल संसद के पटल पर रखा गया था,तब यह कहा गया था कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए किए जा रहे तमाम सामाजिक,आर्थिक बदलाव के बावजूद उनकी स्थिति में कोई ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। उन पर हो रही क्रूरता के मामले दिन ब दिन बढ़ते ही जा रहे हैं, तथा कुछ मामलों में तो उन्हें अपने आत्मसम्मान तथा संपत्ति के साथ-साथ जान तक गवानी पड़ती है।

जब भी SC/ST समुदाय के लोग किसी गलत बात का विरोध करते हैं, या अपने अधिकारों की बात करते हैं तो ताकतवर लोग उन्हें डराने की कोशिश करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में सिविल राइट एक्ट 1955 तथा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के द्वारा किए गए प्रावधान इस समुदाय के लोगों को न्याय दिलाने में कमजोर पड़ रहे हैं।

गैर SC/ST लोगों की ओर से SC/ST समुदाय के लोगों पर किए गए जा रहे हैं अत्याचारो को चिन्हित करने में समस्या आ रही है। ऐसे में जरूरत एक ऐसे सशक्त कानून की है जो उनके खिलाफ होने वाले अत्याचारों को परिभाषित करें तथा ऐसे लोगों को कड़ी सजा की व्यवस्था करें तथा इस समुदाय के लोगों को पुनर्वासित करें । इन सब दलीलों के साथ संसद ने अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम (अत्याचार निरोधक)  1989 को पास कर दिया।

एससी/एसटी एक्ट (Sc/St Act)  एक्ट किस पर लागू होता है।

यह कानून देश के हर उस शख्स पर लागू होता है जो SC/ST समुदाय का सदस्य नहीं है,अगर ऐसा कोई SC/ST से ताल्लुक रखने वाले किसी शख्स का उत्पीड़न करता है, तो उसके खिलाफ SC/ST अधिनियम 1989 के तहत कार्यवाही की जाती है, तथा साथ ही साथ उस पर इस अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा के तहत भी कार्यवाही की जाती है।

एससी/एसटी एक्ट (Sc/St Act)  एक्ट में केस दर्ज होने पर प्रावधान।

  1. आरोपित व्यक्ति के लिए
  • एससी/एसटी एक्ट में आरोपित व्यक्ति पर भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत भी कार्यवाही होती है,तथा इसमें 6 महीने से लेकर उम्रकैद तक की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान है।
  • एससी/एसटी एक्ट धारा 3 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति इस समुदाय के किसी व्यक्ति के विरुद्ध झूठा सबूत देगा जिससे कि निर्दोष SC/ST के व्यक्ति को मृत्युदंड की सजा मिली हो तो उसे आजीवन कारावास व जुर्माना होगा,और यदि किसी निर्दोष SC/ST को इसमें फांसी हो गई हो तो उसे भी फांसी की सजा होगी। और अगर मत्युदंड नही मिला हो तो 6 महीने से लेकर अधिकतम 7 वर्ष तक कि सज़ा व जुर्माने का प्रावधान है।
  • एससी/एसटी एक्ट की धारा 4 के अनुसार किसी लोक सेवक पर केस तभी दर्ज किया जा सकता है,जब पूरे मामले की जांच के दौरान सरकारी अधिकारी दोषी पाया गया हो तथा इसमें लोक सेवा अधिकारी को इस कानून के तहत 6 महीने से लेकर 1 साल तक की सजा होती है
  • एससी/एसटी एक्ट की धारा 5 के अनुसार अगर गैर SC/ ST व्यक्ति पहले भी इस अधिनियम के अंतर्गत आरोपित हो चुका हो और फिर से अगर व्यक्ति आरोपित होता है तो उसे कम से कम 1 वर्ष व अधिक से अधिक अधिकतम सजा मिलेगी।
  • ‎एससी/एसटी एक्ट की धारा 6 के अनुसार व्यक्ति पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा के तहत भी कार्यवाही की जाती है।
  • एससी/एसटी एक्ट की धारा 7 के अनुसार दोष सिद्ध होने पर उस व्यक्ति की चल व अचल संपत्ति को न्यायालय सरकार को सौप सकती है।
  • एससी/एसटी एक्ट की धारा 8 के अनुसार अगर किसी व्यक्ति ने अभियुक्त की किसी भी रूप में सहायता की है तो उसे भी सजा का प्रावधान है।
  1. पीड़ितों के लिए
  • इस समुदाय के पीड़ितों को यह कानून विशेष सुरक्षा मुहैया कराता है।
    ‎इस कानून के तहत पीड़ित को अलग-अलग अपराध के लिए ₹ से लेकर ₹ तक की सहायता दी जाती हैं।
    ‎ऐसे मामलों के लिए इस कानून की धारा 14 के तहत विशेष अदालतें  बनाई जाती है, जो इस उन मामलों में तुरंत फैसले लेती है।
  • इस एक्ट के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराधों में पीड़िता को राहत राशि और अलग से मेडिकल जांच की भी व्यवस्था है।
  • एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ मामलों में पीड़ितों को अपना केस लड़ने के लिए सरकार की ओर से आर्थिक मदद भी दी जाती है।

 

किसकिस अपराध के लिए लागू होता है।

  • SC/ST समुदाय के लोगों की जमीन पर जबरन कब्जा करना तथा गैर कानूनी ढंग से जमीन को हथियाने पर।
  • SC/ST समुदाय के शख्स को भीख मांगने के लिए मजबूर करना।
  • SC/ST समुदाय की महिला को अपमानित करना।
  • SC/ST समुदाय के किसी सदस्य के साथ मारपीट करना।
  • SC/ST समुदाय के किसी सदस्य का सामाजिक बहिष्कार करना।
  • SC/ST के लोगों को अपमानित करना तथा उन्हें जबरन अखाद्य पदार्थ खिलाना।
  • किसी SC/ST के साथ कारोबार करने से इनकार करना।
  • SC/ST समुदाय के किसी सदस्य को अपना मकान छोड़ने पर मजबूर करना।
  • SC/ST के लोगों को किसी सार्वजनिक जगह पर जाने से रोकना।
  • इस समुदाय के लोगों को बंधुआ मजदूर बनाना।
  • SC/ST समुदाय के किसी शख्स के कपड़े उतारना या उसके चेहरे पर कालिख पोतना।
  • उसके घर के आस-पास या परिवार में उन्हें अपमानित करना या किसी भी तरह से परेशान करना या सार्वजनिक तौर पर अपमानित करना।
  • SC/ST समुदाय को किसी तरह की सेवा देने से इनकार करना।
  • SC/ST समुदाय के लोगो को काम ना देना या नौकरी पर रखने से इंकार करना।
  • यह सब ऐसे अपराध है जिसमें भारतीय दंड संहिता लगती है, लेकिन अगर यह अपराध गैर SC/ST करें तो आईपीसी के साथ-साथ एससी/एसटी अधिनियम भी लगेगा।

 

एससी/एसटी एक्ट (Sc/St Act) एक्ट में क्या कार्यवाही होती है।

  • यदि इस अधिनियम के अंतर्गत केस दर्ज होता है, तो आरोपित व्यक्ति की तुरंत गिरफ्तारी होगी तथा उसे अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत केस दर्ज होने पर जमानत निचली अदालत नहीं दे सकती है सिर्फ हाईकोर्ट ही इसमें जमानत दे सकती है।
  • इसमें पुलिस को गिरफ्तारी के 60 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल करनी होती है।
  • ‎इस एक्ट के लिए सुनवाई विशेष अदालतों में होती हैं जो ऐसे मामलों में तुरंत फैसले लेती हैं।

 

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