श्रद्धा सोनकर, किसी से कम नहीं है शहर की फुटबॉल प्लेयर

खटीक महासंघ कानपुर : दंगल फिल्म में आमिर खान का एक डायलॉग है म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के। कुछ ऐसा ही कमेंट ग्रीनपार्क मैदान में श्रद्धा को मिला और उसने खुद की क्षमताओं को साबित करते हुए फुटबाल की नेशनल प्लेयर बन गई। शहर की बेटी श्रद्धा उन सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है जो लड़कियों को लड़कों से कम आंकते हैं।

बादशाहीनाका सब्जी मंडी निवासी श्रद्धा सोनकर बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। पिता चन्द्रशेखर सब्जी विक्रेता और मां आशा ग्रहणी हैं। सेन कालेज में कक्षा छह में पढ़ने के दौरान जब श्रद्धा को स्कूल की तरफ से ग्रीनपार्क में हैंडबाल खेलने भेजा गया तो वहां फुटबाल ग्राउंड में खेलने लगी। वहां खेल रहे लड़कों ने कहा लड़कियां फुटबाल नहीं खेल सकतीं तुम हैंडबाल कोर्ट में जाओ। श्रद्धा को यह बात खटक गई और फिर कठिन परिश्रम व अभ्यास से वह आज नेशनल फुटबाल प्लेयर बन गई। घर की आर्थिक स्थिति कई बार खेल की राह में रोड़ा बनी, लेकिन पिता और परिवार ने हर प्रयास करके जरूरत पूरी की। श्रद्धा अब तक आधा दर्जन से अधिक नेशनल और कई बार स्टेट टूर्नामेंट में अपने खेल का प्रदर्शन कर चुकी हैं। अभी वह एक निजी स्कूल में स्पो‌र्ट्स टीचर के रूप में नौकरी करते हुए अपनी पीएचडी की पढ़ाई के लिए तत्पर हैं।

इन प्रतियोगिताओं में किया नाम रोशन

-2008 असम, 2008 गोवा, 2009 हल्दवानी, 2010 ओडिशा कटक, 2017 फगवाड़ा में नेशनल

-2010 कुरुक्षेत्र, 2011 फरीदाबाद, 2016 उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, बनारस, आगरा, गोरखपुर, लखीमपुर में स्टेट चैंपियनशिप

-अंडर 17 में एक इंडिया कैंप ग्वालियर में

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